श्री दावड़ा विश्वविद्यालय में अंधश्रद्धा के विरुद्ध वैज्ञानिक जागरूकता कार्यशाला संपन्न

“श्री दावड़ा विश्वविद्यालय, नया रायपुर में विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर ‘अंधश्रद्धा निर्मूलन व वैज्ञानिक दृष्टिकोण’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें डॉ. दिनेश मिश्र ने सामाजिक कुरीतियों के वैज्ञानिक विश्लेषण के माध्यम से जागरूकता फैलाने पर जोर दिया।”

श्री दावड़ा विश्वविद्यालय में अंधश्रद्धा के विरुद्ध वैज्ञानिक जागरूकता कार्यशाला संपन्न

श्री दावड़ा विश्वविद्यालय, नया रायपुर, छत्तीसगढ़ में दिनांक 07 अप्रैल 2026 को “विश्व स्वास्थ्य दिवस” के अवसर पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका शीर्षक था, छत्तीसगढ़ में अंधश्रद्धा: निर्मूलन व वैज्ञानिक कार्यशाला

डॉ. दिनेश मिश्र, अंचल व देश के प्रसिद्ध अंधश्रद्धा नेत्र रोग विशेषज्ञ एवम् अध्यक्ष- अंधश्रद्धा: निर्मूलन समिति छत्तीसगढ़ , इस वैज्ञानिक कार्यशाला के विशेषज्ञ रहे। डॉ. मिश्र, विगत 30 वर्षों से अंधश्रद्धा निर्मूलन चला रहे हैं, जिनका उद्देश्य समाज में फैले कुरीतियां जैसे -जादू-टोना, टोटका, झाड़-फूंक, टोनही, भूत-प्रेत, नजर, ताबीज, भभूत आदि के वैज्ञानिक विश्लेषण द्वारा समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना व सामाजिक, आर्थिक, मानसिक व वैचारिक क्षति से बचाना है।

डॉ. मिश्र व इनकी संस्था द्वारा नियमित रूप से गांव, कस्बे व शहरों में वैज्ञानिक शिविर का आयोजन कर जन जागृति अभियान चलाया जाता है। इन शिविरो में ग्रामीण जन, पंच, सरपंच, शिक्षक व शासकीय–अशासकीय कर्मचारी भी सम्मिलित होकर, न केवल खुद जागरूक होते है बल्कि अपने-अपने संस्था व परिवेश के अन्य लोगों को भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण हेतु प्रेरित करते है।

डॉ. मिश्र की संस्था ने अब तक 5000 से भी अधिक प्रताड़ित महिलओं को जीवन व सामाजिक सुरक्षा प्रदान की है। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति छत्तीसगढ़ समय-समय पर सामाजिक कुरीतियों  व अवैज्ञानिक आडम्बरो के विरुद्ध धरना-प्रदर्शन भी करती है व इनसे संबंधित नियम व कानून लागू करवाने में भी सहयोग देती रही है।

डॉ. मिश्र के इस कार्यशाला में लगभग 125 सामाजिक कुरीतियों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया।

इन 125 कुरीतियों से सम्बंधित केश– स्टडी का अनुभव भी श्रोताओ के सम्मुख साझा किया। इनमें से कई पुस्तकों के रूप में, नियम-कानून के रूप में व शैक्षणिक पाठ्यक्रम के रूप में, जनमानस से जुडी।

डॉ. मिश्र ने इस कार्यशाला में कई टोटको का वैज्ञानिक विश्लेषण व प्रदर्शन भी किया। उन्होंने श्रोताओ के सम्मुख नींबू से खून निकालना, हाथ से आग प्रज्वलित करना, आग से खेलना, तस्वीर से भभूत निकालना आदि का वैज्ञानिक व प्रायोगिक प्रदर्शन किया गया एवम् इनमे सम्मिलित विभिन्न रासायनिक तत्वों के गुणधर्म  व इनके रिएक्शन की विस्तृत व्याख्या भी की जिससे भविष्य में अवैज्ञानिक चमत्कार के चंगुल से बचा जा सके।

इस कार्यशाला में श्रोताओ द्वारा कई प्रश्न पूछे गये, जिनका डॉ. मिश्र ने सरल व वैग्रानिक उत्तर दिया। डॉ. मिश्र द्वारा लिखित विभिन्न पुस्तकें भी श्री दावड़ा विश्वविद्यालय पुस्तकालय में दी गई, जिससे विद्यार्थी व शिक्षक गन, सामाजिक व वैज्ञानिक चेतना से हमेसा खुद को प्रेरित करते रहे।

प्रो. मनीष वर्मा ने डॉ. मिश्र व उनकी टीम को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस कार्यशाला के बाद, ट्रेफिक सिग्नल लाल होने पर क्रास नही करेंगे व बिल्ली के रास्ता काटने पर भी नही रुकेंगे, के सन्देश के साथ, एक नयी राज प्रशस्त की। डॉ. सुनील कश्यप इस वैज्ञानिक कार्यशाला के संयोजक रहे।

इस कार्यक्रम में श्री दावड़ा विश्वविद्यालय के सी. ई. ओ., महानिदेशिका, मानद निदेशक , कुलपति, कुलसचिव, विभिन्न संकाय के प्राध्यापक, कर्मचारी व विद्यार्थी सम्मिलित हुए।